सपना

मैं हूँ सपना,

सोच से मैं लेती हूँ जन्म,
बेहोशी मैं काम करती हूँ,
होश मैं आने पर मुरझाती हूँ,
उसी सोच पे अड़ जाती हूँ !!

हर सोच को नया रूप देते हुए,
नयी दुनिया मैं ले जाती हूँ,
हर किसीको अपना कहते हुए,
अपने आप मैं उलझा जाती हूँ !!

कभी हसाते हुए,कभी रूलाते हुए,
कभी डरते हुए,कभी घबराते हुए,
कभी तड़पते हुए,कभी तरसाते हुए,
कभी सच बनके सामने आती हूँ,और कभी सिर्फ एक सपना बनेका रह जाती हूँ !!

मैं हूँ सपना ....

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