उसके गोद में पला बड़ा,
उसके आँचल मैं खेला,
मैंने पुछा, क्या तुम हमेशा मेरे साथ हो?
उसने हस्के कहा, मैं सबके साथ हूँ !
कभी उससे हाथ मिलाया,
कभी उससे मुँह मोड़ लिया,
मैंने पुछा, क्या तुम नाराज़ हो ?
उसने हस्के कहा, मैं तो बस तुम्हारी नजरिया हूँ !
कभी उसका क़दर किया,
कभी उसका इंतज़ार किया,
मैंने पुछा, क्या तुम बेदर्द हो ?
उसने हस्के कहा, मैं तो हर दर्द का उपाय हूँ !
कभी उसने हसाया,
कभी उसने रुलाया,
मैंने पुछा, क्या तुम खेल रहे हो ?
उसने हस्के कहा, मैं तो बस झेल रहा हूँ !
कभी वह मेरे साथ था,
कभी वह मेरे साथ सख्त था,
मैंने पुछा , क्या तुम साशन कर रहे हो ?
उसने हस्के कहा , मैं तो बस अनुशासन सिखाने की कोशिश कर रहा हूँ !
कभी वह सच लगता था ,
कभी वह झूट ,
मैंने पुछा , क्या तुम …?
उसने मुझे टोक के कहा , मैं तो ….
किसीकी जीत हूँ , तो किसीकी हार ,
किसीकी प्रीत हूँ , तो किसीकी प्यार ,
किसीकी सुबह हूँ , तो किसीकी शाम ,
समय हैं मेरा नाम , चलते रहना हैं मेरा काम !
उसके आँचल मैं खेला,
मैंने पुछा, क्या तुम हमेशा मेरे साथ हो?
उसने हस्के कहा, मैं सबके साथ हूँ !
कभी उससे हाथ मिलाया,
कभी उससे मुँह मोड़ लिया,
मैंने पुछा, क्या तुम नाराज़ हो ?
उसने हस्के कहा, मैं तो बस तुम्हारी नजरिया हूँ !
कभी उसका क़दर किया,
कभी उसका इंतज़ार किया,
मैंने पुछा, क्या तुम बेदर्द हो ?
उसने हस्के कहा, मैं तो हर दर्द का उपाय हूँ !
कभी उसने हसाया,
कभी उसने रुलाया,
मैंने पुछा, क्या तुम खेल रहे हो ?
उसने हस्के कहा, मैं तो बस झेल रहा हूँ !
कभी वह मेरे साथ था,
कभी वह मेरे साथ सख्त था,
मैंने पुछा , क्या तुम साशन कर रहे हो ?
उसने हस्के कहा , मैं तो बस अनुशासन सिखाने की कोशिश कर रहा हूँ !
कभी वह सच लगता था ,
कभी वह झूट ,
मैंने पुछा , क्या तुम …?
उसने मुझे टोक के कहा , मैं तो ….
किसीकी जीत हूँ , तो किसीकी हार ,
किसीकी प्रीत हूँ , तो किसीकी प्यार ,
किसीकी सुबह हूँ , तो किसीकी शाम ,
समय हैं मेरा नाम , चलते रहना हैं मेरा काम !
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